लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक और प्रशासनिक सफर कई ऐसे रिकॉर्डों से भरा है, जिन्होंने उन्हें प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई है। भगवाधारी संन्यासी से देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर लगातार चर्चा का विषय रहा है। उत्तर प्रदेश को अब तक 21 मुख्यमंत्री मिल चुके हैं, लेकिन योगी आदित्यनाथ के नाम कई ऐसे राजनीतिक और प्रशासनिक कीर्तिमान दर्ज हैं, जो उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाते हैं।
26 साल की उम्र में बने थे देश के सबसे युवा सांसद
योगी आदित्यनाथ ने बेहद कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बना ली थी। गोरखनाथ मठ से जुड़ने और महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी बनने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोरखपुर से जीत हासिल कर वह महज 26 वर्ष की आयु में संसद पहुंचे। इसके साथ ही वह उस समय देश के सबसे युवा सांसद बन गए। इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार गोरखपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ कायम रखी।
उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे समय तक लगातार मुख्यमंत्री
मार्च 2017 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया अध्याय लिखा। उन्होंने न केवल अपना पहला कार्यकाल पूरा किया, बल्कि 2022 में दोबारा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटकर इतिहास भी रच दिया। इसके साथ ही वह प्रदेश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार मुख्यमंत्री बने रहने वाले नेता बन गए। इससे पहले कई मुख्यमंत्रियों ने पूर्ण कार्यकाल पूरे किए, लेकिन लगातार इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का रिकॉर्ड किसी के नाम नहीं था।
नोएडा से जुड़े राजनीतिक मिथक को किया खत्म
उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्षों से यह धारणा प्रचलित रही कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, वह दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाता। इस कारण कई मुख्यमंत्रियों ने नोएडा के दौरे से दूरी बनाए रखी थी। योगी आदित्यनाथ ने इस धारणा को चुनौती देते हुए अपने पहले कार्यकाल में कई बार नोएडा का दौरा किया। इसके बावजूद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा को दोबारा प्रचंड बहुमत दिलाया और लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले नेता बन गए।
‘बुलडोजर बाबा’ की पहचान से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को अपनी सरकार की प्राथमिकता बनाया। अपराधियों, माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बुलडोजर का व्यापक इस्तेमाल हुआ। इसी के बाद उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से पहचान मिलने लगी। उनकी इस कार्यशैली ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस को जन्म दिया और कई राज्यों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिली।
विकास और धार्मिक पर्यटन दोनों पर फोकस
योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया। प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को गति मिली, जिससे उत्तर प्रदेश की पहचान ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ के रूप में मजबूत हुई। वहीं अयोध्या, काशी, मथुरा और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों के विकास पर भी बड़े स्तर पर काम हुआ। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र पर भी देखने को मिला।
राजनीति से प्रशासन तक बना अलग मॉडल
योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली को समर्थक ‘योगी मॉडल’ के रूप में प्रस्तुत करते हैं। कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी, निवेश आकर्षित करने और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दों पर उनकी सरकार लगातार चर्चा में रही है। यही वजह है कि नौ वर्षों के करीब के कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति के भी प्रमुख चेहरों में शामिल हो चुके हैं।
